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आपने तीन बिजनेस का नाम लिया। इंपोर्ट, एक्सपोर्ट और ई-कॉमर्स। इंपोर्ट बढ़ा है या एक्सपोर्ट बढ़ा है? जीएसटी गवर्नमेंट ने हर चीज पे लगा दिया लेकिन एक्सपोर्ट पे नहीं लगा पाई वो। एक्सपोर्ट का मतलब आदमी कपड़ा ही समझता है नो एनसीआर। इंडिया आज तक एक डेवलप्ड कंट्री नहीं बन पाया। आप कौन से बड़े देशों में काम कर रहे हैं? हेड ऑफिस हमारा अहमदाबाद गुजरात में है। आप मुझे ये बताएं कि मैं किस धंधे में उतरूं? सर अगर आपको मैं सच बताऊंगा ना, तो आप यहां का काम बंद कर दोगे। वो मैं चाहता नहीं हूं। मैं आपके लिए हमेशा अवेलेबल रहूंगा। नहीं करेंगे। वादा रहा है। आपके पास लोग आते होंगे। किस तरह की मुश्किल वो फेस कर रहा है? तो इतना बड़ा कंट्री, इतना बड़ा यूथ से भरा हुआ कंट्री क्यों नंबर वन पे नहीं है? कोई नंबर फोर पे है भाई? मैं सोच ही रहा था आपके पॉडकास्ट पे आने से पहले कि सर्वेश भाई के पास जा रहा हूं तो पॉलिटिक्स पॉलिटिक्स की बात तो जरूर होएगी। एक सवाल और दुबई का आपने नाम लिया था। दुबई के लिए भी एक सवाल है मेरा। दुबई का नाम आप बार-बार ले रहे हैं। वहां पे एक लॉबी है पाकिस्तानियों की। वहां पे जो भी इंडियंस आ रहे हैं स्पेशली जो नए बिजनेसमैन हैं उनको जमने नहीं देते। अच्छा। उनके साथ चीटिंग करेंगे, फ्रॉड करेंगे, लड़ाईयां करेंगे, उनके काम को जमने नहीं देंगे। ये दिक्कतें उनको पैदा करते हैं। आप आएंगे वहां पे बिज़नेस करेंगे। कोई भी डिफिकल्टी नहीं आएगी हम बैठे हैं। आप बिज़नेस करो। हम आपको बताएंगे किससे करना है, किससे नहीं करना है। कौन सही लोग हैं, कौन गलत लोग हैं। अगर किसी एक प्रोडक्ट को लेकर के आपसे संपर्क करते हैं तो क्या आप उनको बाजार दे सकते हैं? हम उनको बाजार देते हैं। मार्केट देते हैं। क्या आप पाकिस्तान के साथ धंधा कर रहे थे आप लोग? इंडिया और पाकिस्तान के बीच में भी होता है लेकिन इनडायरेक्टली होता है। कैसे होता है मैं आपको बताता हूं। तो दुबई बीच में रख के ये ऑपरेशन सिंदूर के बाद जो हालात बने हैं 11 कंट्री है जो ब्रह्मोस मिसाइल मांग रहे हैं। ऑपरेशन सिंदूर में अडानी बहुत मशहूर हुए क्योंकि उनकी कंपनीज़ बनी हुई कुछ चीजें यूज़ हुई है। यस एक्सपोर्ट और खाली गुड्स का सर्विस का नहीं होता है। लोगों का भी होता है। जो टैलेंटेड लोग हैं सब बाहर चले जाते हैं। वहां पे अगर 1 लाख का धंधा करते हो तो वो 24 लाख हुआ था सर। होम फर्निशिंग आइटम, टेक्निकल आइटम, लाइट्स, कैमरा, लो लेबर कॉस्ट कंट्री है इंडिया। तो जितनी चीजों में हाथ का यूज़ हो रहा है उन सब चीजों का एक्सपोर्ट ज्यादा होता है। आपको एक इंटरेस्टिंग चीज बताता हूं। उनको पूरा एक्सपोर्टर बना देते हैं लाख में और लाइफ टाइम के लिए वो कितना भी चाहे उतना एक्सपोर्ट एक कंट्री आपका हो गया तो आपका जिंदगी सेट आपका बिनेस सेट पूरा पूरे साल में जितना कमा रहे हैं एक एक महीने में उतना कमा रहा है एक लाइन से वो पर जैसे ही मैं लिखूंगा 0507 तो वियतनाम भी समझ जाएगा चाइना भी समझ जाएगा आपने बहुत आसान कर दिया इसका मतलब इसको अब मेक इन इंडिया लोग कहते हैं कि भ मेक इन इंडिया जुमला है मेड इन इंडिया वो लिखा हुआ है इसको ये सब इंडिया से एक्सपोर्ट हो रहा है पूरे अफ्रीका में जो बाइक चलती है आप देखेंगे TVS की है या तो या बजाज की है। ट्रंप ने क्या किया है? ड्यूटी उठाके सब पे लगा दी। हां। इंडिया का तो नुकसान की जगह फायदा हो गया। मैंने यह मान लिया कि आपकी एक टीम है वहां पे। मैं कहीं किसी चीज में फंस गया। फिर कैसे क्या चीजें होती हैं। कहां पे छतरी चाहिए कहां पे नहीं चाहिए। वो सब उनको बता के रखते हैं। ₹25,000 से बिज़नेस में धंधा स्टार्ट कर सकते हैं। बिल्कुल कर सकते हैं। आप 5 ₹100 का इमिटेशन ज्वेलरी, हैंडीक्राफ्ट, कपड़ा, टॉयज जो देख रहा होगा उसको लग रहा होगा बिज़नेस करना कितना आसान है। सच में आसान है। धीरूभाई अंबानी ने जब बिज़नेस चालू किया तो वो सिल्क का एक्सपोर्ट करते थे। एक यूथ है वो इंपोर्ट एक्सपोर्ट के बारे में कुछ नहीं जानता है। तो उसको शुरुआत कहां से करनी चाहिए? वो सीधा कूदेगा वो सही नहीं है। हमारा सामान तो चला गया पैसा मार के बैठ गया। ठोक देंगे तो वो नहीं करना। आपके माल की आपकी पेमेंट की जो सेफ्टी की गारंटी है वो हमारी है। सर्वेश भाई का माल यहां पर पड़ा है। आके देख लो। चेक करके पैसा देके माल ले जाओ। बिज़नेस हो गया। इंडिया का एक्सपोर्ट हो गया। सब कुछ हो गया। सबका फायदा। नुकसान किसका है? हमारा 5 लाख फस लोग आने वाले एक साल में थाईलैंड, इंडोनेशिया ये दो कंट्री में और जा रहे हैं। दिसंबर तक ये दो जगह पे कंपनी खोल रहे हैं। तो अगले आने वाले दो चार साल में हम 101 कंट्री में पहुंच जाएंगे। पर्पस यही है हम कि जो मेन लोगों को हमें इंटरनेशनल लेवल पे ल्च करना है। उनके ब्रांड के लेके जाना है। उनको बिजनेस को लेके जाना है। उस पे पूरा फोकस है। ओके। अब आपका जो क्वेश्चन है कि मदर कैसे करते हैं? मैं आपको एक लाइव केस स्टडी देता हूं जो हमारी खुद की केस स्टडी है। कि क्लाइंट थे हमारे हैदराबाद से। ठीक है। उनका टीशर्ट का मैन्युफैक्चरिंग का वो था प्लांट वहां पे। अभी भी है। वो टीशर्ट के मैन्युफैक्चरर है। ठीक है। तो उन्होंने हमसे संपर्क किया कि भ हम आप हमें कैसे इसमें हेल्प करोगे? तो वो हमारे साथ आए कनेक्ट हुए। हम तो हमारी जो दुबई वाली टीम है, दुबई में जो हमारी कंपनी है, वहां की जो टीम है, हम वो वहां का जो मुर्शिद बाजार है दुबई में जो होलसेल मार्केट है जहां पे ये सारी चीजों की ट्रेनिंग होती है। ठीक है? वहां पे गए मीटिंग्स निकाला बायरर्स से उनके कांटेक्ट निकाले। उनके विजिटिंग कार्ड लेके उनको भेजे हम और उनका वर्चुअली और फिजिकली वीडियो पे उनकी बहुत सारी मीटिंग्स करवाई दुबई में। दुबई में इंडिया से बैठे-बैठे उनको जाना नहीं पड़ा कहीं। ठीक है? और जब उनके कुछ चार पांच फाइनल हो गए कि हां भाई ये पांच छह लोग हमारे काम के हैं। तो जैसे ही उनका नेक्स्ट विजिट हुआ दुबई में उनको उनसे मीटिंग करवाया। हम उनमें से दो तीन लोगों से उनका टाई अप हो गया। अभी जो माल उनका अभी इंडिया में जितना जा रहा था उसका 10 टाइम्स माल वो दुबई में बेच रहे हैं अकेले। अच्छा और पेमेंट यहां इंडिया में आ रहा था रुपी में वहां आ रहा है दराम में। दम आज 24 का है सर। ओके। अगर यहां पे आप इंडिया में धंधा करते हो तो ₹1 लाख का धंधा हुआ तो ₹1 लाख हुआ। ठीक है। वहां पे अगर ₹1 लाख का धंधा करते हो तो वो ₹24 लाख हुआ सर। हम 24 टाइम्स। ये करेंसी का और ये एक्सपोर्ट की मजेदारी है। और सबसे बड़ी मुश्किल क्या होती है ना आपने बताया कि वो इंडिया में बैठकर के दुबई में धंधा कर रहा है। जो इंडिया में बैठ के धंधा बड़ा करना भी चाहता है ना वो सोचता है यार इंटरनेशनल लिंक कैसे बनेंगे? ट्रांसपोर्टेशन कैसे होगी चीजें? कैसे वहां क्लियर करवाएगा आदमी शिपमेंट में? तो ये उसके लिए एक बड़ी प्रॉब्लम होती है। तो अगर हम बिल्कुल आसान शब्दों में समझे तो आप इंडिया में बैठे हुए बिजनेसमैनों को दूसरे देशों में मार्केट प्रोवाइड करवाते हैं। आपकी टीम उनको मार्केट देती है। यही है। बिल्कुल। हमने इसके लिए पूरा एक इकोसिस्टम तैयार कर दिया है। ठीक है? लोगों को क्या चाहिए? कोई भी माल उनको भेजना है तो उसको उसका पहले तो उसका प्रोक्योरमेंट चाहिए। यानी माल सप्लाई करना है। अगर खुद बना रहे हैं तो अपनी फैक्ट्री की पैकिंग करनी है। खुद नहीं बना रहे तो बनवाना है किसी से। तो इसको बोलते हैं सोर्सिंग। सोर्सिंग करना है पहले। फिर सोर्सिंग करने के बाद उसको क्लियर करना है यहां पे पोर्ट पे ले जाके। यहां से क्लियर होगा, माल चेक होगा, वेरीफाई होगा, फिर आगे जाएगा। ठीक है? फिर जिस कंट्री में भेज रहे हैं, उस कंट्री के पोर्ट पे पहुंचेगा। वहां से क्लियर होगा। ठीक है? और उस कंट्री के पोर्ट से भी फिर आके मार्केट में जाएगा। अगर मलेशिया भेज रहे हैं तो मलेशिया में पहले पोर्ट क्लांग है वहां पे। पोर्ट क्लांग पे जाएगा। तो पोर्ट क्ल से वहां पे जो होलसेल मार्केट है मान लीजिए पसरंग है तो पसर बोरांग में जाएगा और वहां से आगे फिर वो कंज्यूमर तक पहुंचेगा तो हमने इसका पूरा इकोसिस्टम बना दिया है कि भाई इंडिया में अगर सप्लायर चाहिए आपको किसी भी चीज का तो सप्लायर डेस्क मौजूद है जीएफ में ठीक है अगर क्लियरिंग करानी है इंडिया में तो इंडियन क्लियरिंग डेस्क मौजूद है हम अगर बाहर फॉरेन कंट्री में कहीं पे क्लियरिंग करनी है अपने माल की तो वहां की क्लियरिंग डेस्क अलग बनी हुई है। हम और बाहर किसी भी कंट्री में बायरर्स आपको चाहिए तो उसकी बायर की जो डेस्क है वो अलग बनी हुई है। ओके। तो डिफरेंट डेस्क बना के उनकी प्रॉब्लम को सॉल्व कर दिया गया है कि भ आपको जिस चीज से काम है वो चीज आपको हेल्प हो जाएगी। आपने बहुत आसान कर दिया इसका मतलब इसको। तो इंडिया से हमने अपना माल भेजा उसके बाद वो सब आपके टीम के हवाले आपकी टीम अलग-अलग स्टेज पे अलग-अलग सपोर्ट करती रहेगी। यस। जो आपने चारप कंट्री का नाम लिया जहां पर आप हैं। किन चीजों का एक्सपोर्ट ज्यादा है? किन चीजों का इंपोर्ट ज्यादा है वहां से? देखिए इंडिया में टेक्नोलॉजी का इंपोर्ट अभी ज्यादा है? ओके। इंडिया में लैपटॉप, मोबाइल फोन, इनकी एक्सेसरीज, होम फर्निशिंग आइटम, टेक्निकल आइटम, लाइट्स, कैमरा ये सारी चीजों का इंपोर्ट ज्यादा है। जो टेक्निकल चीजें हैं जो मशीनों से बनती हैं। हम जो हाथ से बनती है जिसमें मजदूर ज्यादा यूज़ होता है, लेबर ज्यादा यूज़ होता है। क्योंकि इंडिया एक लेबर कॉस्ट वाला लेबर कॉस्ट जहां पे कम है वो कंट्री है। हम लो लेबर कॉस्ट कंट्री है इंडिया। हम तो जिन चीजों में लेबर का यूज़ होता है वो सारी एक्सपोर्ट होती है। क्योंकि लेबर कॉस्ट कम तो टोटल कॉस्ट कम हो गई। हां। टोटल कॉस्ट कम हो गई तो पूरे वर्ल्ड में छा गया वो प्रोडक्ट। तो यहां का एग्रीकल्चर जिसका कोई इलाज इसका कोई कंपटीशन ही नहीं है। बाहर यहां का जो कपड़ा है उसका कोई कंपटीशन नहीं है। यहां का जो हैंडीक्राफ्ट है उसका कोई कंपटीशन नहीं है। यहां की जो फ्रूट एंड वेजिटेबल्स है क्योंकि वो सब किसान अपने हाथों से उगाते हैं उसका कोई कंपटीशन नहीं है। हां। कनेक्ट कर दिया जाएगा। तो भदोई का जो कारपेट है वो हां ऐसे ही पटना का जो मखाना है वो हां मिट्टी के बर्तन है हाथ से बने हुए हां मुरादाबाद के जो बर्तन है वो पीतल के पीतल के तो ये पूरा एक वन डिस्ट्रिक्ट वन प्रोडक्ट लगा के गवर्नमेंट उसको पूरा इकोसिस्टम बना के देती है उसमें हेल्प भी करती है तो अगर इन शहरों के सुनने वाले लोग अगर किसी एक प्रोडक्ट को लेकर के आपसे संपर्क करते हैं तो क्या आप उनको बाजार दे सकते हैं? हम उनको बाजार देते हैं, मार्केट देते हैं। कंट्री हम उनको बता देते हैं कि भ 200 कंट्री में एक्सपोर्ट हो रहा है। लेकिन तुम्हारा जो प्रोडक्ट है वो कौन से टॉप के पांच कंट्री में जा रहा है। अच्छा वहां पे ही फोकस करो। बाकी टाइम वेस्ट मत करो। उससे उनका टाइम बच गया, पैसा बच गया। फिर वो पांच कंट्री में भी कौन-कौन से लोग हैं, कौन-कौन से इंपोर्टर्स हैं जो आपका माल इंपोर्ट कर रहे हैं। वो डाटा निकाल के हम उनको दे देते हैं। अच्छा। तो वहां से उनका और टाइम बच गया। हां। उनको फॉलो अप कर लेंगे। 19 से उनका बिज़नेस निकल जाएगा। और एक भी डील अगर आपकी फाइनल हो गई तो वो एक सर्कुलर बिज़नेस चलता है सालों साल। हां। हर महीने आपसे कंटेनर ले रहा है। हर वीक आपसे माल ले रहा है। हर साल आपसे माल जा रहा है। एक बयर एक कंट्री आपका हो गया तो आपका जिंदगी सेट आपका बिजनेस सेट पूरा। इस तरह का पूरा धंधा है ये। नहीं नहीं सबसे बड़ी मुश्किल तो यही होती है ना मार्केट का मिलना क्योंकि सर्विस और प्रोडक्ट तो हर कोई बनाने अच्छा आप प्रोडक्ट में ही डील करते हैं या सर्विज में भी डील करते हैं? सर्विस में भी डील करते हैं। बहुत सारे हमारे पास हमारे क्लाइंट ऐसे हैं जो डिजिटल मार्केटर हैं, जो चार्टर्ड अकाउंटेंट हैं। जैसे कुछ हमारे पास तीन सीए ऐसे हैं अभी जिनका दुबई में जो दुबई का जो वट है ना उसकी फाइलिंग करते हैं। वो आपको एक इंटरेस्टिंग चीज बताता हूं। हम ये सीए लोग यहां पे जो कॉस्ट लेते हैं यहां पे जीएसटी फाइल करने की पूरे साल की कॉस्ट वो 10 या ₹12,000 ₹15,000 में जीएसटी फाइलिंग करते हैं। ओनली जीएसटी। बाकी सब चीज़ अलग है। हम हम दुबई में जीएसटी का एक महीने का जो खर्चा ये लोग लेते हैं एक महीने का वो 500 दहम लेते हैं। अच्छा। ठीक है? तो ₹12,000 सिर्फ एक महीने का हो गया जो उनको मिलता है 500 दिम। अच्छा। वहां की ये कॉस्ट है। तो और ये ये फायदा होता है एक्सपोर्ट का, करेंसी का बेनिफिट ये सब मिलता है। पूरे साल में जितना कमा रहे हैं एक एक महीने में उतना कमा रहा है एक क्लाइंट से वो। तो अब जो सोच रहा होगा वही तो ये भी सोच रहा होगा कि जीएफपी का मेंबर कैसे बनते हैं? तो आप लोग भी कुछ चार्ज करते होंगे। क्या कमीशन बेस पे हो शायद हिस्सेदारी? हमारे पास सिंपल मेनली उससे पहचाना जाएगा दूसरा कंट्री भी समझ जाएगा हां माइक है क्योंकि इस माइक को जर्मनी में कुछ और बोलते हैं। चाइना में कुछ और बोलते हैं। वियतनाम में कुछ और बोलते हैं। इंडिया में कुछ और बोलते हैं। इंडिया में माइक बोलते हैं। पर जैसे ही मैं लिखूंगा 0507 तो वियतनाम भी समझ जाएगा, चाइना भी समझ जाएगा और हर कंट्री समझ जाएगा। जर्मनी भी समझ जाएगा कि हां ये मई की बात हो रही है। ये एक बड़ी बात है कि मतलब तो एचएस कोड निकाल के हमारी जो टीम है उनके एचएस कोड मैप करती है। निकालती है कि भ कौन-कौन से कंट्री में मेन इनका एक्सपोर्ट हो रहा है। और वहां के कौन-कौन से मेन इंपोर्टर्स हैं जो ये माल लेके जा रहे हैं। वो डाटा निकाल के उसको फिल्टरवेल्टर करके इनको देती है कि भ ये आपके काम के लोग हैं। इनसे बात करो और बात करने में कोई डिफिकल्टी आती है तो उसमें हम हेल्प करते हैं। कुछ लोगों की इंग्लिश अच्छी नहीं होती, कम्युनिकेशन अच्छा नहीं होता। तो उसमें हम उनकी हेल्प करते हैं। कम्युनिकेशन हमारी टीम करती है उनके बिहाफ पे। पिछले दिनों मैं अपने एक मित्र के साथ बैठा हुआ था जो कपड़े के व्यवसाई वो कपड़ा बनाते हैं। उनकी एक बड़ी शिपमेंट जानी थी और वहां से कोई आया चेकर उसने चेक किया और एक उसकी वजह से फेल कर दिया। तो चलो वो तो इंडिया में फेल हुई थी लेकिन उनके साथ एक वाकया और भी हुआ था। उनका माल वहां गया ड्यूटी लगाई है। तो जो लोग यहां से एक्सपोर्ट का काम कर रहे हैं कितना असर बिज़नेस पे पड़ेगा इस ड्यूटी का? नहीं इसका फायदा हुआ है। ओवर हुआ है। ट्रंप ने क्या किया है? ड्यूटी उठा के सब पे लगा दी। और जिस पे जिसको बोलते हैं रेसिप्रोकल ड्यूटी। यानी जिसकी जितनी ड्यूटी थी उतनी ड्यूटी सब पे उल्टा लगा दिया। अच्छा। इंडिया की ड्यूटी ऑलरेडी कम थी। तो इंडिया पे कम लगी। तो फायदा कि इंडिया का तो नुकसान की जगह फायदा हो गया। अच्छा। ड्यूटी ज्यादा लग गई चाइना पे। ड्यूटी ज्यादा लग गई बांग्लादेश पे। ड्यूटी लगी इंडिया पे लेकिन कम लगी। तो पहले ज्यादा एक्सपोर्ट हो रहा था बांग्लादेश से और चाइना से इंटू यूएस। इंडिया का कम था। हां। अभी इंडिया सस्ता हो गया वहां पे। अभी इंडिया का एक्सपोर्ट बढ़ेगा। ओके। तो फायदा इंडिया को ज्यादा मिलने वाला है फॉर्च्योर। और ये जो अभी माहौल जो बना हुआ है जैसे पाकिस्तान के साथ जो हुआ क्या आप पाकिस्तान के साथ धंधा कर रहे थे आप लोग? आपके एक क्लाइंट थे ऐसे जो पाकिस्तान में देखो मैं झूठ नहीं बोलूंगा इस फोरम पे। धंधा तो हर कंट्री का आपस में होता है। इंडिया और पाकिस्तान के बीच में भी होता है। लेकिन इनडायरेक्टली होता है। कैसे होता है मैं आपको बताता हूं। इंडिया से राइस आता है। इंडिया का जो राइस है वो बहुत फेमस है सब जगह पे। वो इंडिया का राइस आता है दुबई में। दुबई से पाकिस्तान जाता है। अच्छा। पाकिस्तान से कपड़ा आता है दुबई में वो इंडिया जाता है। तो दुबई बीच में रख के पाकिस्तान से डेट्स आता है यानी खजूर खजूर आते हैं। वो पहले दुबई आता है दुबई से इंडिया चला जाता है। हां तो ऐसे करके दुबई में माल आता है। वहां से ओरिजिन उसका ओरिजिन चेंज होता है और फिर वापस रीएक्सोर्ट हो जाता है। तो इस तरह से डायरेक्टली इनडायरेक्टली काम अभी जो हुआ है मतलब जो इस तरह के युद्ध के माहौल दुबई के तो थ्रू फर्क नहीं पड़ा है इस पे लेकिन इंडिया से डायरेक्टली पहले भी नहीं था। कोई ज्यादा ट्रेड अभी भी नहीं है। ओके। लेकिन इसका एक दूसरा फर्क जरूर मैं आपको बताऊं कि ये ऑपरेशन सिंदूर के बाद जो हालात बने हैं हम अभी इंडिया एक बहुत बड़ी पावर इमर्ज हो के आया है कि भ इंडिया की खुद की जो मिसाइल टेक्नोलॉजी है खुद की जो जैसे इन्होंने आकाश और ब्रह्मोस का यूज़ किया। हम अभी ब्रह्मोस 11 कंट्री है जो ब्रह्मोस मिसाइल मांग रहे हैं। अच्छा मैं इसको बोलता हूं डिफेंस एक्सपोर्ट। हम हम ये जो डिफेंस एक्सपोर्ट का फील्ड है ये बहुत बड़ा इमर्ज हो रहा है। अभी हम अभी फिलीपींस ने हमसे ली थी अभी दो साल पहले मिसाइल। हम ठीक है। अभी वियतनाम मांग रहा है। अभी ताइवान मांग रहा है। ऐसे 11 कंट्री लाइन में लगा के खड़े हुए हैं। ब्रह्मोस के लिए हम अभी लखनऊ में एक सेंटर खोलना पड़ा इनको कि भ इसमें और ब्रह्मोस बनानी पड़ेगी। इतनी डिमांड आ रही है। अभी भी ये भी एक्सपोर्ट है। ये भी एक्सपोर्ट बढ़ रहा है। एक्सपोर्ट हर लेवल पे इंडिया का बढ़ रहा है। चाहे छोटा लेवल हो, चाहे बड़ा लेवल हो, चाहे डिफेंस लेवल हो। अभी डिफेंस में Mahindra आ गई है। अभी अडानी आ गए हैं डिफेंस में। अभी अडानी तो मतलब इस युद्ध में भी इस ऑफिस सिंदूर में अडानी बहुत मशहूर हुए क्योंकि उनकी कंपनीज़ बनी हुई कुछ चीज़ यूज़ हुई है। यस यस। तो ये प्राइवेट कंपनी है। प्राइवेट प्लेयर हैं। ये अपना वो बना रहे हैं। डिफेंस के प्रोडक्ट बना रहे हैं जो बाहर यूज़ होने वाले हैं अभी। तो इंडिया डिफेंस सेक्टर में बहुत बड़ा बूम में आने वाला है एक्सपोर्ट में भी। अच्छा इतने सवाल दिमाग में आ रहे हैं ना कि वो एक-एक करके वो स्लिप भी कर रहे हैं। अभी आपने जो डिफेंस की बात की तो वियतनाम का आपने नाम लिया। ताइवान का आपने नाम लिया। कुछ कंट्री का आपने नाम लिया। गल्फ कंट्री का नाम दिया आपने। तो आप वहां ऑलरेडी धंधा कर रहे हो। तो क्या कभी ऐसा आता है क्या कि इस डिफेंस सेक्टर का भी कुछ आपको मिले आपके तहत वहां पे धंधा हो रहे हो? इसमें क्या होता है कि डिफेंस में जो चीजें यूज़ होती है ना उनके स्पेयर पार्ट्स होते हैं। जैसे बहुत सारे स्पेयर पार्ट राजकोट में बनते हैं। हां गगनयान गया था आपको पता होगा उसमें कुछ जाए। वहां के जो लॉ हैं उनको आप लोग कैसे करते हो? कैसे मैनेज करते हो? मैंने ये मान लिया कि आपकी एक टीम है वहां पे। लेकिन जो आदमी जाता है उसको कैसे पता होगा? जैसे मुझे किसी कंट्री जाना हो, मैं कहीं किसी चीज में फंस गया, फिर कैसे क्या चीजें होती हैं? हमारे पास एक स्पेशल ट्रेवल डेस्क हमने बनाई हुई है जो हमारी खुद की क्योंकि बहुत सारी ट्रेवलिंग होती है हमारी टीम की। और हमारे साथ जो लोग मेंबर्स जुड़े हुए हैं उनकी बहुत सारी वो होती है ट्रेवलिंग। हमारे साल में चारप बार तो हमारे डेलीगेशन जाते हैं ट्रेड डेलीगेशन जिसमें हम पूरा ग्रुप को लेके जाते हैं। तो ये सारा ट्रेवल मैनेज करने के लिए हमारी एक स्पेशल ट्रेवल डेस्क बनी हुई है। वो पूरा एडवाइज़री गाइडेंस देती है कि भाई कौन से कंट्री में जा रहे हो तो क्या-क्या तैयारी से जाना है। क्या चीजों का ध्यान रखना है? में क्या डस है क्या डोंट्स हैं हम क्या लेके जाना है साथ में कहां पे छतरी चाहिए कहां पे नहीं चाहिए वो सब उनको बता के रखते हैं ओके तो उसके बाद उनके काम आसान हो जाता है मतलब एक तरह से ये देख लें कि आपका ये सपोर्ट सिस्टम उन सभी लोगों के लिए जो बिजनेस करते हैं अगर वो आपसे जुड़ते हैं चाहे देश में या देश से बाहर वो उनको पूरा अपना सपोर्ट करता है जिससे उनकी जर्नी थोड़ी आसान हो जाती है। जी मतलब इंडिया को हम लोग ग्लोबली बहुत स्ट्रांग देखना चाहते हैं। बनाना चाहते हैं। इंडिया को और इंडियंस का रुतबा बढ़ना चाहिए वर्ल्ड में। चाहे वो कैसे भी हो। अब बाहर जाके जाके अपने लोकल धंधे चालू करो वहां पे अपना एस्टब्लिशमेंट बनाओ अपनी दुकान खरीदो वहां पे अपना बनाओ वेयर हाउस लो जो भी करना है करो हमने अभी एक क्लाइंट को वहां पे पूरा वेयर हाउस सेटअप करके दिया है दुबई में उनका पूरा कंपनी उनका पूरा ऑफिस उनका पूरा वेयर हाउस हमने सेटअप किया है दुबई में हम हम तो ये सारी जितना ज्यादा हमारा कंट्रोल रहेगा पूरे वर्ल्ड की चीजों पे उतना हम चाहते हैं। उसके लिए ये सब चीजें चल रही है। दुबई का नाम आप बार-बार ले रहे हैं। अभी हम पीछे खबर ही पढ़ रहे थे कि और आप जो बता रहे थे आप ज्यादातर अपना काम भी गल्फ कंट्रीियों में कर रहे हैं। यहां के लोग भी गल्फ में ज्यादा जाते हैं। लेकिन हमने सुना है दुबई में एक मोनोपोली काम करती है जो गल्फ कंट्रीियों की है। कुछ लोगों के इस तरह का टीम है। तो क्या ये सही है और वहां काम करने में दिक्कत होती है आम आदमी को। देखिए वहां पे दो तीन लॉबी बनी हुई है बड़ी स्ट्रांग। वहां पे एक लॉबी है पाकिस्तानियों की। ठीक है। ये लोग क्या करते हैं कि वहां पे जो भी इंडियंस आ रहे स्पेशली जो नए बिजनेसमैन है उनको जमने नहीं देते हैं। अच्छा। वहां पे एक लॉबी है जो है बांग्लादेशियों की। अच्छा। तो ये दो तीन लॉबी है वहां पे जो अगेंस्ट काम करती है जो इंडियन बिजनेसमैन है उनके उनके साथ चीटिंग करेंगे, फ्रॉड करेंगे, लड़ाईयां करेंगे। उनके काम को जमने नहीं देंगे। ये दिक्कतें उनको पैदा करते हैं। हम अब जब से हम वहां पे हमने अपना पूरा सेटअप किया है। हमने वहां टीम्स बनाई है। अपने हमारा नेटवर्क खड़ा किया है वहां पे। हमने वहां के जो अच्छे बिज़नेसमैन है चाहे वो कहीं के भी हो। इंडिया के भी हैं, पाकिस्तान के भी हैं, बांग्लादेश के भी हैं, फिलीपींस के भी हैं। उनसे नेटवर्क बना के जब काम स्टार्ट किया है हम तो उसके थ्रू हमने अब किसी अपने हमारे किसी बिजनेसमैन को प्रॉब्लम नहीं आने दे। उसके लिए हमने पूरा सिस्टम तैयार किया है। आप आएंगे वहां पे बिज़नेस करेंगे। कोई भी डिफिकल्टी आएगी हम बैठे हैं। आप बिज़नेस करो। हम हम आपको बताएंगे किससे करना है, किससे नहीं करना है। कौन सही लोग हैं, कौन गलत लोग हैं। अच्छा ये आप डिसाइड करो। ये सब हम डिसाइड करके उनको बता देते हैं। तो उनका काम आसान हो गया। जो काम सीखने में उनको 5 साल लगेंगे। हम उनको 5 दिन में बता दें। उनका काम आसान हो गया। टाइम बच गया 5 साल का। उसीलिए तो आपकी सर्विस लेंगे वो। जी यह दुबई की जो सरकार लगातार इनवाइट कर रही है कि इंडिया के लोग आए यहां अपना बिज़नेस खड़ा करें अपना इन्वेस्ट करें। तो क्या वो सपोर्ट करती है? सपोर्ट करती है। वहां पे सेफ्टी सिक्योरिटी अच्छी है। मैं आपको सच बताऊं तो मुझे अच्छा नहीं लगता किसी कंट्री का तारीफ करना अपने देश के आगे। हां। लेकिन अगर सच्चाई की बात हो तो वहां पे सिक्योरिटी ज्यादा है। अच्छा। वहां पे रिटर्न्स ज्यादा है। वहां पे टैक्सेस कम है। वहां पे ईज़ ऑफ़ लाइफ ज्यादा है। वहां पे ईज़ ऑफ़ डूइंग बिज़नेस ज्यादा है। मैं चाहता हूं कि हमारा कंट्री भी ऐसा हो। हमारा कंट्री को भी हम ऐसे ही देखना चाहता हूं। उसके लिए मैं बहुत ज्यादा काम करना चाहता हूं। बहुत ज्यादा मेहनत करना चाहता हूं और वहां से सीख के दूसरे देशों से अच्छी बातें सीख के अपने कंट्री में मैं अप्लाई करना चाहता हूं। ओके। अच्छा एक इनिशियल सवाल दिमाग में आया कि कोई एक व्यक्ति है अगर वो एक्सपोर्ट करना चाहता है तो क्या उसको सर्टिफिकेट वगैरह बनवाना होगा? क्या प्रोसेस होता है? थोड़ा बता पाएंगे आप? एक्सपोर्ट के लिए बेसिक डॉक्यूमेंटेशन होता है। क्योंकि देखो डोमेस्टिक भी बिज़नेस करना है तो आपको एमएसएमई लेना पड़ेगा। जीएसटी लेना पड़ेगा। हां। एक्सपोर्ट करना है तो आईसी और ले लो और आरसीएमसी ले लो। फिओ का सर्टिफिकेट ले लो। हो गया। दो तीन सर्टिफिकेट और ले लो। ये आप दिलवा। एक्सपोर्ट की तैयारी हो गई। हम दिलवा देते है' बिजनेस मॉडल (Delegation Strategy) के बारे में और विस्तार से जानकारी ढूँढूँ ताकि आप अपनी टीम को बेहतर ढंग से मैनेज कर सकें?
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